एलोवेरा [ग्वारपाठा]

एलोवेरा [ग्वारपाठा]

 
 
एलोवेरा एक बहुगुणकारी औषधि वनस्पति के रूप में जानी जाती है। इसी कारण सौंदर्य से लेकर कई बीमारियों में काम आने वाली एलोवेरा की मांग दिन ब दिन बढाती जा रही है। एलोवेरा बहुवर्षायु वनस्पती के तौर पर जानी जाती है। इस वनस्पति के पत्ते लंबे और मांसल होते है, और पत्तो के भीतर पानी गूदे के रूप में पाया जाता है। पत्तो के कोनों में कांटे होते है। एलोवेरा की खेती इस लेख में हम कुछ दिलचस्प जानकारी लेते हैं।

उपयोग :

  • एलोवेरा ठंडी, कड़वी, मधुर ऐसे कई गुणों से संपन्न होती है।
  • एलोवेरा की मदत से कुमारी आसव बनाते है, जो शारीरिक कमजोरी, खांसी, अस्थमा आदि बीमारियों में गुणकारी साबित होता है।
  • एलोवेरा से बनाया तेल बालो में चमक लाता है।
  • अच्छी त्वचा और सौंदर्यवृद्धि के लिए एलोवेरा के गूदे का प्रयोग किया जाता हैं।

जमीन और मौसम

  • एलोवेरा की फसल के लिए हलकी और पानी का अच्छा रिसाव होने वाली जमीन अच्छी होती है।
  • गरम और शुष्क मौसम फायदेमंद होता है।
  • इस वनस्पति को पानी कम लगने के कारण, कम वर्षा वाले क्षेत्र में भी इसकी फसल संभव है।

जमीन की जोताई

  • जमीन की अच्छी तरह जोताई करे।
  • कचरा और अनचाही चीजे निकालकर गोबरखाद मिलाले।
  • जुलाई का महीना एलोवेरा की खेती के लिए बेहतर माना जाता हैं।
  • रोपण करते वक्त दो पौधों में ४५ सें.मी. का अंतर तथा दो लाईन्स में ६० सें. मी. की दुरी रक्खे।

पानी प्रबंधन

  • वर्षा और ठण्ड के मौसम में ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती।
  • गर्मी के मौसम में १५ दिन में एक बार पानी दे।

प्रबंधन

  • जरुरत अनुसार त्रण नियंत्रण के लिए जरुरी कदम उठाये।
  • पौधे के जड़ो के पास मिट्टी भरने  करने पर पौधे तेजी से बढ़ जाते है।

बीमारी/ किट

  • इस वनस्पति पर किसी खास रोग या किट का प्रभाव अबतक सामने नहीं आया है।

कटाई

  • पत्ते का कुछ हिस्सा या पत्ता पूरी तरह से पिला होनेपर, वनस्पति लगबघ १४ से १६ माह की होने के पश्चात् कटाई करना संभव है।
  • पत्ते निकलते समय मुख्य पौधे को हानि न पहुँचे इसपर ध्यान दे।
  • कटाई से पहले पौधे को पानी देने पर पत्तो के भीतर पानी की मात्रा बढ़ जाती है।
    एलोवेरा [ग्वारपाठा]
    प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल -एक एकड़
    लागत दर - 2/- रुपये प्रति पौधे की दर से एक एकड़ में लगभग 12000 पौधे लगाए जा सकने के आधार पर  12000 x 2 = 24000/-
    समयावधि - 1 से 7 वर्षो के लिए
    औसत उत्पादन - प्रति पौधे 1 किलो,12000×1=12000 किलो
    प्रथम उत्पादन 1 वर्ष में उसके बाद 3 बार सालाना आगामी 7 वर्षो तक
     

    नोट:- उपरोक्त विवरण में लागत,आय,खर्च,समय आदि सामान्य रूप से ली जाने वाली फसल के आधार पर है जो मूल रूप से प्रकृति ,पर्यावरण एवं भौगोलिक परिस्थितियो पर निर्भर है।अतः आय को अनुमानित आधार पर दर्शाया गया है। जिसमे परिवर्तन (कम ज्यादा)हो सकता हैं। 

  • इस विषय पर किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आप कॉल कर सकते है  8235862311
    औषधीय खेती विकास संस्थान 
    www.akvsherbal.com
    सर्वे भवन्तु सुखिनः 

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