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काली तुलसी

तुलसी - (ऑसीमम सैक्टम) एक शाकीय तथा औषधीय पौधा है। इनमें ऑसीमम सैक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया जाता है, इसकी भी दो प्रधान प्रजातियाँ हैं- श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं। इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है। तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है। इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। तुलसी की पत्तियों में एक चमकीला पीला वाष्पशील तेल पाया जाता है जो कीड़े और बैक्टीरिया के खिलाफ उपयोगी होता है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और १ से ३ फुट ऊँचा होता है। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं ८ इंच लम्बी और बहुरंगी छटाओं वाली होती है, जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे हृदयाकार पुष्प चक्रों में लगते हैं। बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों...

ब्रह्ममी

ब्राह्मी का पौधा पूरी तरह से औषधीय है। यह पौधा भूमि पर फैलकर बड़ा होता है। इसके तने और पत्तियां मुलायम, गूदेदार और फूल सफेद होते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम बाकोपा मोनिएरी है। ब्राह्मी के फूल छोटे, सफेद, नीले और गुलाबी रंग के होते हैं। -यह पौधा नम स्‍थानों में पाया जाता है, तथा मुख्‍यत: भारत ही इसकी उपज भूमि है। ब्राह्मी का एक पौधा होता है जो भूमि पर फैलकर बड़ा होता है। इसके तने और पत्तियॉं मुलामय, गूदेदार और फूल सफेद होते है। ब्राह्मी हरे और सफेद रंग की होती है। इसका स्वाद फीका होता है और इसकी तासीर शीतल होती है। ब्राह्मी कब्‍ज को दूर करती है। इसके पत्‍ते के रस को पेट्रोल के साथ मिलाकर लगाने से गठिया दूर होता है। ब्राह्मी में रक्‍त शुद्ध करने के गुण भी पाये जाते है। यह हृदय के लिये भी पौष्टिक होता है। ब्राह्मी को यह नाम उसके बुद्धिवर्धक होने के गुण के कारण दिया गया है। इसे जलनिम्ब भी कहते हैं क्योंकि यह प्रधानतः जलासन्न भूमि में पाई जाती है। आयुर्वेद में इसका बहुत बड़ा नाम है। औषधीय गुण - यह पूर्ण रूपेण औषधी पौधा है। यह औषधि नाडि़यों के लिये पौष्टिक होती है। उपयोग इसका उपयोग ...

औषधीय खेती एवम रोजगार की संभवानाएं

औषधीय खेती एवम रोजगार की संभावनाएं। जैसा कि हम सभी जानते है कि समय बदल चुका है जहां कुछ साल पहले लोग अंग्रेज़ी दवाओं पर ही विश्वास करते थे वही आज भारत की मूल चिकित्सा एवम उपचार की विधा आयुर्वेद पर लोगो का विश्वास बढ़ गया हैं। आज अनगिनत कंपनियां आयुर्वेद से जुड़े उत्पाद बना रही है। जिन्हें उत्पदों को बनाने के लिए कई प्रकार की जड़ी बूटियों की आवश्यकता होती है।जिसका मूल आधार वन संपदा रही है लेकिन आज चूंकि वन संपदा भी विलुप्ति के कगार पर है अतः औषधीय खेती ही एक मात्र विकल्प है जिसके सहारे न सिर्फ विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी औषधीय वनस्पतियों को बचाया जा सकता है अपितु उनकी खेती कर अच्छा लाभ भी कमाया जा सकता है। अतः औषधीय खेती लाभ का एक अच्छा विकल्प साबित हो रहा है। चूंकि किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग औषधीय खेती के महत्व को समझ कर इसमें आ चुका है अतः निश्चित ही इसमें मार्केटिंग(विपणन),संग्रहण, प्रसंस्करण,संरक्षण के साथ साथ सप्लाई से जुड़े व्यापार, व्यवसाय की भी अपार संभावनाएं है। अतः यदि आप ग्रमीण अंचल से जुड़े है,और आपकी जान पहचान किसानों से है तो आप एक अच्छे औषधीय खेती सलाहकार क...

Distributorship

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  "डिस्ट्रीब्यूटर/प्रतिनिधि" के कार्य क्षेत्र 1) कृषक बंधुओ से मिलकर उन्हें औषधीय खेती के सम्बन्ध में जानकारी देना। 2) संस्थान के नियमानुसार अपने व्यवसाय को बढ़ाना। 3) संस्थान द्वारा निर्देशित फ़सलों को लगवाना ,परामर्श देना एवं परिपक्वता की अवस्था में उत्पादन के प्रसंस्करण में हमारे विशेषज्ञ द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के अंतर्गत कार्य को संपन्न करवाना । संस्थान की और से आपको दिया जाने वाला सहयोग:- 1) प्रशिक्षण 2) प्रचार सामग्री 3) प्रत्येक अनुबंध पर 10% तात्कालिक लाभ 4) उत्पादन / रकबा के लक्ष्य अनुसार अतिरिक्त लाभांश 5) उत्पादन खरीदी का अनुबंध 6) आपके क्षेत्र के इच्छुक कृषकों की जानकारी 7) अपने क्षेत्र के  "डिस्ट्रीब्यूटरशिप/प्रतिनिधि"  को सेवा में सहायता प्रदान करना। "डिस्ट्रीब्यूटरशिप/प्रतिनिधि" लेने के नियम:- 1) 12500/- का शुल्क :- जिसके एवज मे संस्थान द्वारा वर्तमान में करवाये जा रहे औषधीय फ़सल की जानकारी दी जायेगी । 2)  "डिस्ट्रीब्यूटरशिप/प्रतिनिधि"  का प्रमाणपत्र दिया जायेगा। इस प्रकार आप अपने क्षेत्र में ...

अकरकरा

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अकरकरा अकरकरा आयुर्वेदिक  ग्रंथों में खासकर मध्यकालीन ग्रंथों में इसे आकारकरभ नाम से वर्णित किया गया है जिसे हिंदी में अकरकरा भी कहा जाता है।अंग्रेजी में इसी वनस्पति का नाम पेलिटोरी है।इस वनस्पति का प्रयोग  ट्रेडीशनल एवं पारंपरिक चिकित्सकों द्वारा दांतों एवं मसूड़े से सम्बंधित समस्याओं को दूर करने हेतु सदियों से किया जाता रहा है| इस पौधे के सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग इसके फूल एवं जडें हैं।जब इसके फूलों एवं पत्तियों को चबाया जाता है तो यह एक प्रकार से दाँतों एवं मसूड़ों में सुन्नता उत्पन्न करता है। इसके फूल इसके सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं।यूँ तो इसे मूल रूप से ब्राजील एवं अफ्रीका से आयी वनस्पति माना जाता है लेकिन यह हर प्रकार के वातावरण चाहे वो उष्णता हो या शीतकालीन में उगने वाली वनस्पति है।इस पौधे की विशेषता इसके फूलों का विशिष्ट आकार है जो कोन यानि शंकु के आकार के होते हैं।पत्तियों का प्रयोग त्वचा रोग में भी किया जाता है। जानिए विभिन्न रोगों में अकरकरा से उपचार 1 पक्षाघात (लकवा) में अकरकरा : अकरकरा की सूखी डण्डी महुए के तेल में मिलाकर मालिश करने ...

नोनी [ NONI ]

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नोनी के चमत्कारिक स्वास्थ्य लाभ किसी भी बीमारी में रामबाण औषधि की तरह काम करता है।  एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्‍वों से भरपूर है।  नोनी इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाने में मदद करता हैं।  उच्च रक्तचाप और माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए लाभदायक। प्रकृति से मिलने वाले फलों में कुछ न कुछ औष‍धीय गुण जरूर होते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही फल के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में शायद आप नहीं जानते होगें। लेकिन ये आम लोगों के लिए जितना गुमनाम है, आपकी सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद। यह फल किसी भी बीमारी में रामबाण औषधि की तरह काम करता है। जी हां इस चमत्‍कारी फल का नाम नोनी है। यह फल शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम को बूस्‍ट करता है। नोनी को वैज्ञानिक एक ऐसी संजीवनी मानते है, जो डायबिटीज, अस्थमा, अर्थराइटिस, दिल, पुरुष की समस्‍याओं आदि सहित कई बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित होता है। यहां तक के यह एड्स और कैंसर के रोगियों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता हैं। नोनी में 150 से अधिक स्वास्थ्यवर्धक विटामिन है और एंटी-ऑक्सीडेंट मौजूद होते है। अगर आप बहुत जल...

जिमीकंद / सुरन

जिमीकंद के ये फायदे जानते हैं आप. जिमीकंद एक गुणकारी सब्जी है। देखने में मिट्टी के रंग की यह सब्जी जमीन के नीचे उगती है। इसे सूरन के नाम से भी जाना जाता है। जिमीकंद बवासीर से लेकर कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बचाए रखता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी6, विटामिन बी1 और फोलिक एसिड होता है। साथ ही जिमीकंद में पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फॉस्फोरस भी पाया जाता है। आज हम आपको बताते हैं कि जिमीकंद खाने से क्या फायदे होते हैं।  आयुर्वेद के अनुसार जिमीकंद उन लोगों को नहीं खाना चाहिए, जिनको किसी भी प्रकार का चर्म रोग हो। जिमीकंद ड्राई, कसैला, खुजली करने वाला होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। आयुर्वेदाचार्य एके गर्ग के मुताबिक, आयुर्वेद में जिमीकंद जड़ औषधि के रूप में प्रयुक्त होती है। पेट से जुड़े रोगों के लिए इसका सेवन रामबाण की तरह होता है। यह दिमाग तेज करने में भी मदद करता है। जिमीकंद खाने से मेमोरी पावर बढ़ती है। साथ ही यह अल्जाइमर रोग होने से भी बचाता है। दिमाग को तेज करने के लिए जिमीकंद को अपने आहार में शामिल करें। ...