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जैतून की खेती : किसानों व निवेशकों के लिए एक सुनहरा एग्री-बिज़नेस अवसर

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  🌿 औषधीय खेती विकास संस्थान की ओर से जैतून की खेती : किसानों व निवेशकों के लिए एक सुनहरा एग्री-बिज़नेस अवसर आज का किसान केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रह सकता। बदलते समय में वही किसान सफल है, जो बाज़ार की माँग को समझते हुए औषधीय व उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाता है। औषधीय खेती विकास संस्थान के मार्गदर्शन में हम किसानों के लिए ऐसी ही एक दीर्घकालिक, सुरक्षित और लाभकारी खेती प्रस्तुत कर रहे हैं— जैतून (Olive) की खेती। जैतून की खेती विश्वभर में “ग्रीन गोल्ड” के नाम से जानी जाती है। भारत में भी यह खेती अब तेज़ी से अपनी जगह बना रही है। विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं उत्तर भारत के शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में इसके सफल परिणाम सामने आए हैं। कम पानी में अच्छा उत्पादन और वर्षों तक स्थिर आमदनी— यही जैतून की खेती की सबसे बड़ी विशेषता है। जैतून ऐसा पौधा है जो एक बार लगाने के बाद 20 से 25 वर्षों तक लगातार उत्पादन देता है। इसकी खेती में न तो अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है और न ही बार-बार रोग व कीट का प्रकोप देखने को मिलता है। ड्रिप सिंचाई पद्धति के माध्यम से यह फसल जल संर...

औषधीय खेती विकास संस्थान व्यावसायिक परिचय (Business Profile)

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  🌿 औषधीय खेती विकास संस्थान व्यावसायिक परिचय (Business Profile) औषधीय खेती विकास संस्थान एक प्रतिष्ठित एवं विश्वसनीय संस्था है, जो विगत 18 वर्षों से औषधीय एवं व्यावसायिक खेती के क्षेत्र में किसानों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। संस्थान का उद्देश्य केवल बीज या पौधों की आपूर्ति करना नहीं, बल्कि किसानों को पूर्ण कृषि समाधान उपलब्ध कराना है। 🎯 हमारा उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना औषधीय खेती को लाभकारी एवं सुरक्षित बनाना खेती को व्यवसाय के रूप में स्थापित करना 🌱 हमारी प्रमुख सेवाएँ उच्च गुणवत्ता वाले बीज एवं पौधों की आपूर्ति अनुभवी कृषि विशेषज्ञों द्वारा पूर्ण तकनीकी मार्गदर्शन शतावरी सहित विभिन्न औषधीय फसलों के लिए व्यावसायिक मॉडल शॉर्ट टर्म फसलों के माध्यम से लागत वसूली की व्यवस्था ड्राई मटेरियल प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण किसानों के लिए बाज़ार एवं बाय-बैक की लिखित व्यवस्था सब्सिडी योजनाओं से जोड़ने में सहयोग नुकसान की स्थिति में वैकल्पिक फसलों द्वारा रिकवरी मॉडल 🤝 हमारी विशेषता आज के बाज़ारवाद के दौर में जहाँ अधिकांश लोग केवल प्लांटिंग मटेरियल बेचकर अपनी जिम्मेदारी समाप्त मान लेते है...
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  क्या वाकई जैविक महंगा है? नहीं… कम से कम आपके हॉस्पिटल के महंगे बिल से तो बिल्कुल नहीं। सच यह है कि वैदिक या जैविक जीवनशैली कभी भी आज की खर्चीली चिकित्सा व्यवस्था से महंगी नहीं हो सकती। फर्क सिर्फ इतना है कि खर्च कब और किस पर किया जा रहा है। आज आप 400–500 रुपये का पिज़्ज़ा, बर्गर, नूडल्स, मोमोज़, चाइनीज़, इटालियन भोजन बड़े आराम से घर मंगवाकर परिवार के साथ खाते हैं। न वह महंगा लगता है, न नुकसानदेह। जबकि सच्चाई यह है कि स्वाद के अलावा इनका शरीर को कोई लाभ नहीं। नतीजा—फैट, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, बीपी और न जाने क्या-क्या। यही चीज़ें धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर आपको हॉस्पिटल पहुँचाती हैं और फिर आता है हज़ारों–लाखों का बिल। आज मज़े के लिए खर्च, और कल सज़ा के रूप में खर्च—साथ में शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियाँ अलग। तो बेहतर है कि भाई, जैविक अपनाइए। अगर आप अच्छा कमा रहे हैं, तो अच्छा खाइए भी। अच्छा खाने का मतलब “कुछ भी” नहीं, बल्कि वह भोजन जो आपके शरीर और स्वास्थ्य की रक्षा करे। जैविक अन्न-अनाज, दालें, मसाले, हल्दी, धनिया, न्यूट्रिशन, कॉस्मेटिक—सब आज बाजार में उपलब्ध हैं। सुबह उठिए,...
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  🌿✨ ऑर्गेनिक औषधीय खेती से भविष्य बनाएं! ✨🌿 💠 सर्पगंधा (Rauvolfia serpentina) की खेती — 100% Buy-Back Agreement के साथ! 💠 🚜 कृषि में नया अवसर — औषधीय पौधों से करें स्थायी आमदनी! 🌱 सर्पगंधा की खासियतें: ✅ उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, मानसिक तनाव आदि के उपचार में उपयोगी ✅ दवा उद्योग में भारी मांग — देश-विदेश में निर्यात योग्य ✅ एक बार लगाएं और 2 साल तक लगातार आय 📅 खेती का समय: जून से अगस्त 📦 फसल तैयार: 18–24 महीनों में 🌾 प्रति एकड़ पौधे: 10,000–12,000 💰 औसत उत्पादन: 15–20 क्विंटल सूखी जड़ 💸 बाजार मूल्य: ₹800 से ₹1200 प्रति किलो तक 🏡 संस्थान से लाभ: 🌿 100% Buy-Back Agreement 🌿 सेंट्रल/स्टेट गवर्नमेंट Subsidy योजना का लाभ 🌿 प्रमाणित पौधे व बीज संस्थान से ही उपलब्ध 🌿 खेती, प्रोसेसिंग व मार्केटिंग का पूरा मार्गदर्शन 🌿 प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता 📞 आज ही संपर्क करें: 👉 ऑर्गेनिक औषधीय खेती से जुड़ें 👉 प्राकृतिक और लाभदायक भविष्य की ओर बढ़ें 🌿 “रोजगार नहीं — एक मिशन है यह खेती!” 🌿 📍 प्रस्तुतकर्ता: 💚 औषधीय खेती विकास संस्थान 💚 (ऑर्गेनिक एवं केमिकल-फ्री कृषि के प्रचार हेतु...

अब बहस का नहीं—निर्णय का समय है।

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 मित्रों, अब बहस का नहीं—निर्णय का समय है। यह संदेश उनके लिए नहीं है जो केवल पोस्ट पढ़ते हैं, टिप्पणी करते हैं और अंत में कुछ नहीं करते। यह संदेश केवल उनके लिए है जो पैसा, परिणाम और भविष्य को लेकर गंभीर हैं। आज भारत में दो प्रकार के किसान और निवेशक हैं— एक, जो हर साल वही खेती करके हर साल वही आर्थिक स्थिति झेलते हैं। और दूसरे, जो समय रहते उच्च-मूल्य वाली औषधीय फसलों में प्रवेश कर खुद को भीड़ से अलग कर लेते हैं। शतावरी इसी दूसरे वर्ग की फसल है। ✔ न जानवर नुकसान करते हैं ✔ न रोग लगते हैं ✔ न भारी सिंचाई चाहिए ✔ और न ही बाज़ार खोजने की ज़रूरत फिर भी अधिकांश लोग इसे नहीं अपनाते— क्योंकि यह दो वर्ष की फसल है। और यहीं से समझदार लोग खेल बदल देते हैं। जब सामान्य किसान पीछे हटे, उत्पादन गिरा और आज शतावरी के भाव इतिहास के सर्वोच्च स्तर पर हैं। अब सुनिए ध्यान से— 👉 AKVS Herbal Group कोई प्रयोग नहीं कर रहा। 👉 हम 2006 से इस सेक्टर में हैं। 👉 हमारी अपनी खेती, अपनी प्रोसेसिंग यूनिट और अपना बाज़ार नेटवर्क है। 👉 हम केवल सलाह नहीं देते— हम उत्पादन खरीदते हैं। यही कारण है कि हमारे साथ जुड़ा किसान ...

खेती एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र में कार्य करने का सुनहरा अवसर।

 आवश्यक सूचना / अवसर AKVS HERBAL GROUP के माध्यम से खेती एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र में कार्य करने का सुनहरा अवसर। हमारे साथ जुड़ी देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियों को शतावरी, अश्वगंधा, मोरिंगा, अकरकरा, केमोमाइल, सफेद मूसली, पपीता, यूकेलिप्टस आदि औषधीय फसलों का सुखा एवं प्रोसेस्ड तैयार माल बड़े पैमाने पर आवश्यक है। जो किसान/उद्यमी इन फसलों की खेती करना या करवाना चाहते हैं, उन्हें AKVS Herbal Group द्वारा खेती से लेकर बिक्री तक पूर्ण तकनीकी एवं विपणन सहयोग प्रदान किया जाएगा। संभावित आय * स्वयं खेती करने पर: 1 एकड़ में 2 वर्षों में ₹10–20 लाख तक की संभावित कमाई * खेती करवाने (कॉन्ट्रैक्ट/समूह मॉडल) पर अनुमानित लाभ: 10 एकड़ – ₹6 लाख 100 एकड़ – ₹60 लाख 1000 एकड़ – ₹6 करोड़ तक (लाभ फसल व बाजार दर पर निर्भर) ✨ जितना कार्य, उतनी आय — औषधीय खेती से आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम। संपर्क करें: AKVS HERBAL GROUP 🌐 वेबसाइट: www.akvsherbal.org 💬 WhatsApp: https://wa.link/07e3o7

फूल वाली अकरकरा की खेती

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  🌼 फूल वाली अकरकरा की खेती (Ful Wali Akarkara) औषधीय खेती विकास संस्थान के साथ फूल वाली अकरकरा (Spilanthes / Acmella प्रजाति) एक अत्यंत उपयोगी औषधीय पौधा है, जिसका फूल, पत्ती और पूरा पौधा दवा, हर्बल और कॉस्मेटिक उद्योग में उपयोग होता है। 🌿 प्रमुख औषधीय उपयोग ✔️ दांत दर्द, मसूड़ों की समस्या ✔️ मुँह के छाले, लार ग्रंथि सक्रिय ✔️ एंटी-बैक्टीरियल व एंटी-इन्फ्लेमेटरी ✔️ आयुर्वेदिक व यूनानी दवाओं में मांग 🌱 जलवायु व भूमि 🌤️ गर्म व आर्द्र जलवायु उपयुक्त 🌱 दोमट मिट्टी, अच्छी जल निकास व्यवस्था ☀️ आंशिक से पूर्ण धूप 🌼 बुवाई व रोपाई 📅 फरवरी–मार्च / जुलाई–अगस्त 🌱 बीज या पौध से रोपाई 📏 कतार दूरी: 30×30 सेमी ⏳ फसल अवधि 🕒 3–4 माह में फूल तुड़ाई शुरू ✂️ कई बार कटाई संभव 💰 अनुमानित आय 💸 ₹3–6 लाख प्रति एकड़ (अनुमानित) (सूखा फूल / हरा पौधा – बाजार व गुणवत्ता पर निर्भर) 🤝 औषधीय खेती विकास संस्थान (AKVS) के साथ ✅ प्रशिक्षण व तकनीकी मार्गदर्शन ✅ प्रमाणित बीज/पौध उपलब्ध ✅ जैविक खेती मॉडल ✅ बाजार व खरीदार से जोड़ ✅ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग सुविधा 🌐 अधिक जानकारी के लिए www.akvsherbal.org