क्या वाकई जैविक महंगा है?


नहीं…

कम से कम आपके हॉस्पिटल के महंगे बिल से तो बिल्कुल नहीं।


सच यह है कि वैदिक या जैविक जीवनशैली कभी भी आज की खर्चीली चिकित्सा व्यवस्था से महंगी नहीं हो सकती। फर्क सिर्फ इतना है कि खर्च कब और किस पर किया जा रहा है।


आज आप 400–500 रुपये का पिज़्ज़ा, बर्गर, नूडल्स, मोमोज़, चाइनीज़, इटालियन भोजन बड़े आराम से घर मंगवाकर परिवार के साथ खाते हैं। न वह महंगा लगता है, न नुकसानदेह। जबकि सच्चाई यह है कि स्वाद के अलावा इनका शरीर को कोई लाभ नहीं।

नतीजा—फैट, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, बीपी और न जाने क्या-क्या।


यही चीज़ें धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर आपको हॉस्पिटल पहुँचाती हैं और फिर आता है हज़ारों–लाखों का बिल।

आज मज़े के लिए खर्च, और कल सज़ा के रूप में खर्च—साथ में शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियाँ अलग।


तो बेहतर है कि भाई, जैविक अपनाइए।


अगर आप अच्छा कमा रहे हैं, तो अच्छा खाइए भी।

अच्छा खाने का मतलब “कुछ भी” नहीं, बल्कि वह भोजन जो आपके शरीर और स्वास्थ्य की रक्षा करे।


जैविक अन्न-अनाज, दालें, मसाले, हल्दी, धनिया, न्यूट्रिशन, कॉस्मेटिक—सब आज बाजार में उपलब्ध हैं।

सुबह उठिए, खाली पेट गुनगुना पानी पीजिए, थोड़ी सैर कीजिए और शुद्ध जैविक भोजन ग्रहण कीजिए।

देखिए—चेहरे की चमक खुद आपकी गवाही देगी।


30 के बाद मोटापा, तोंद, बालों का झड़ना, दाँतों की समस्या, आँखों पर चश्मा, कब्ज, थकान—ये सब केमिकल युक्त भोजन का परिणाम हैं, जिसे आप आज सस्ता समझकर खा रहे हैं।

यही “सस्ता” कल हर तरह से महंगा साबित होता है, हॉस्पिटल के बिल के साथ।


अतः निवेदन है

सस्ता–महंगा छोड़िए,

आज अपने स्वास्थ्य पर खर्च कीजिए—

ताकि कल मजबूरी में खर्च न करना पड़े।


हम प्रामाणिक, केमिकल-फ्री, ऑर्गेनिक उत्पाद उपलब्ध कराते हैं।

ऑर्डर कीजिए—हम घर तक पहुँचाएँगे, लेकिन अच्छा ही देंगे।


औषधीय खेती विकास संस्थान

धन्यवाद

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