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अकरकरा

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अकरकरा अकरकरा आयुर्वेदिक  ग्रंथों में खासकर मध्यकालीन ग्रंथों में इसे आकारकरभ नाम से वर्णित किया गया है जिसे हिंदी में अकरकरा भी कहा जाता है।अंग्रेजी में इसी वनस्पति का नाम पेलिटोरी है।इस वनस्पति का प्रयोग  ट्रेडीशनल एवं पारंपरिक चिकित्सकों द्वारा दांतों एवं मसूड़े से सम्बंधित समस्याओं को दूर करने हेतु सदियों से किया जाता रहा है| इस पौधे के सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग इसके फूल एवं जडें हैं।जब इसके फूलों एवं पत्तियों को चबाया जाता है तो यह एक प्रकार से दाँतों एवं मसूड़ों में सुन्नता उत्पन्न करता है। इसके फूल इसके सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं।यूँ तो इसे मूल रूप से ब्राजील एवं अफ्रीका से आयी वनस्पति माना जाता है लेकिन यह हर प्रकार के वातावरण चाहे वो उष्णता हो या शीतकालीन में उगने वाली वनस्पति है।इस पौधे की विशेषता इसके फूलों का विशिष्ट आकार है जो कोन यानि शंकु के आकार के होते हैं।पत्तियों का प्रयोग त्वचा रोग में भी किया जाता है। जानिए विभिन्न रोगों में अकरकरा से उपचार 1 पक्षाघात (लकवा) में अकरकरा : अकरकरा की सूखी डण्डी महुए के तेल में मिलाकर मालिश करने ...

नोनी [ NONI ]

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नोनी के चमत्कारिक स्वास्थ्य लाभ किसी भी बीमारी में रामबाण औषधि की तरह काम करता है।  एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्‍वों से भरपूर है।  नोनी इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाने में मदद करता हैं।  उच्च रक्तचाप और माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए लाभदायक। प्रकृति से मिलने वाले फलों में कुछ न कुछ औष‍धीय गुण जरूर होते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही फल के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में शायद आप नहीं जानते होगें। लेकिन ये आम लोगों के लिए जितना गुमनाम है, आपकी सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद। यह फल किसी भी बीमारी में रामबाण औषधि की तरह काम करता है। जी हां इस चमत्‍कारी फल का नाम नोनी है। यह फल शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम को बूस्‍ट करता है। नोनी को वैज्ञानिक एक ऐसी संजीवनी मानते है, जो डायबिटीज, अस्थमा, अर्थराइटिस, दिल, पुरुष की समस्‍याओं आदि सहित कई बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित होता है। यहां तक के यह एड्स और कैंसर के रोगियों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता हैं। नोनी में 150 से अधिक स्वास्थ्यवर्धक विटामिन है और एंटी-ऑक्सीडेंट मौजूद होते है। अगर आप बहुत जल...

जिमीकंद / सुरन

जिमीकंद के ये फायदे जानते हैं आप. जिमीकंद एक गुणकारी सब्जी है। देखने में मिट्टी के रंग की यह सब्जी जमीन के नीचे उगती है। इसे सूरन के नाम से भी जाना जाता है। जिमीकंद बवासीर से लेकर कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बचाए रखता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी6, विटामिन बी1 और फोलिक एसिड होता है। साथ ही जिमीकंद में पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फॉस्फोरस भी पाया जाता है। आज हम आपको बताते हैं कि जिमीकंद खाने से क्या फायदे होते हैं।  आयुर्वेद के अनुसार जिमीकंद उन लोगों को नहीं खाना चाहिए, जिनको किसी भी प्रकार का चर्म रोग हो। जिमीकंद ड्राई, कसैला, खुजली करने वाला होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। आयुर्वेदाचार्य एके गर्ग के मुताबिक, आयुर्वेद में जिमीकंद जड़ औषधि के रूप में प्रयुक्त होती है। पेट से जुड़े रोगों के लिए इसका सेवन रामबाण की तरह होता है। यह दिमाग तेज करने में भी मदद करता है। जिमीकंद खाने से मेमोरी पावर बढ़ती है। साथ ही यह अल्जाइमर रोग होने से भी बचाता है। दिमाग को तेज करने के लिए जिमीकंद को अपने आहार में शामिल करें। ...

बड़ी इलायची/लार्ज कार्डेमम की उन्नत खेती

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-:बड़ी इलायची/लार्ज कार्डेमम की उन्नत खेती करने का तरीका :- संरचना :  बड़ी इलायची को लार्ज कार्डेमम के नाम से भी जाना जाता है | इसका वनस्पतिक नाम एमोमम सूबुलेटम है | यह जिन्जीबरेसी प्रजाति का पौधा है | इसका तना 0. ९ मीटर से २. 0 मीटर तक लम्बा होता है | इसके पौधे की पत्तियां 30 से 60 सेंटीमीटर लम्बी और 6 से 9 सेंटीमीटर चौड़ी होती है | इन पत्तियों का रंग हरा होता है और दोनों तरफ से रोम रहित होता है | इसके फूल के वृंत छोटे और गोल आकार में होते है | इसका फल 2 . 5 सेंटीमीटर लम्बा और गोलाकार होता है | इसका रंग लाल भूरा और घना कंटीला होता है | बड़ी इलायची के उपयोग :-  इलायची को मसाले की रानी कहा जाता है | इसका उपयोग भोजन का स्वाद बढाने के लिए किया जाता है | लेकिन इसमें औषधिय गुण भी होते है जिससे मनुष्य अपनी बीमारी को दूर करते है | बड़ी इलायची से बनने वाली दवाईयों का उपयोग पेट दर्द को ठीक करने के लिए , वात , कफ , पित्त , अपच , अजीर्ण , रक्त और मूत्र आदि रोगों को ठीक करने के लिए  किया जाता है |  बड़ी इलायची के उपर एक छिलके जैसा आवरण होता है जिसके अंदर बीज ह...

सागौन

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सागौन सागौन को इमारती लकड़ी का राजा कहा जाता है जो वर्बेनेसी परिवार से संबंध रखता है। इसका वैज्ञानिक नाम टैक्टोना ग्रांडिस है। इसका पेड़ बहुत लंबा होता है और अच्छी किस्म की लकड़ी पैदा करता है। यही वजह है कि इसकी देश और विदेश के बाजार में अच्छी डिमांड है। सागौन से बनाए गए सामान अच्छी क्वालिटी के होते हैं और ज्यादा दिनों तक टिकते भी हैं। इसलिए सागौन की लकड़ी से बने फर्नीचर की घर और ऑफिस दोनों जगहों पर भारी मांग हमेशा रहती है। पूरी दुनिया में सागौन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए आम तौर पर सागौन की अच्छी किस्म की खेती की जाती है जिसमें कम रिस्क पर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। लगभग 14 सालों में अच्छी सिंचाई, उपजाऊ मिट्टी के साथ वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिेए एक पेड़ से 10 से 15 क्यूबिक फीट लकड़ी हासिल की जा सकती है। इस दौरान पेड़ के मुख्य तने की लंबाई 25-30 फीट, मोटाई35-45 ईंच तक हो जाती है। आमतौर पर एक एकड़ में 400 अच्छी क्वालिटी के आनुवांशिक पेड़ तैयार किये जा सकते हैं। इसके लिए सागौन के पौधों के बीच 9/12 फीट का अंतराल रखना होता है। भारत में सा...