सफलता खैरात में नहीं मिलती, उसे हासिल करना पड़ता है।
दोस्तों, सफलता खैरात में नहीं मिलती, उसे हासिल करना पड़ता है। पुस्तैनी धन, दौलत और जमीन—यदि उनकी देखरेख न की जाए, तो वे नष्ट हो जाती हैं। जैसे आपके पूर्वजों ने अपनी मेहनत और योग्यता से समृद्धि अर्जित कर आपको सौंपी, वैसे ही आपका भी कर्तव्य है कि आप आने वाली पीढ़ी को इससे और अधिक देकर जाएँ। लेकिन ज़रा सोचिए— क्या आप ऐसा कर पा रहे हैं? क्या आपने अपनी जमीन में एक एकड़ भी बढ़ाया है, या उल्टा बेचकर उसे घटाया है? सफलता की चाह रखने वाले लोगों की अपनी अलग पहचान होती है। उनके भीतर जिज्ञासा होती है—क्या आपके भीतर है? उनमें जोखिम उठाने की क्षमता होती है—क्या आप जोखिम ले सकते हैं? वे प्रयोगधर्मी होते हैं—क्या आप कुछ नया आज़माने को तैयार हैं? वे निडर होते हैं, समय के साथ चलते हैं और बदलाव को पहले भाँप लेते हैं— क्या ये गुण आपके अंदर हैं? ऐसी बहुत-सी बातें हैं जो एक व्यक्ति को भीड़ से अलग पहचान देती हैं। वरना दुनिया क्या है—एक भीड़, और भीड़ का हिस्सा। बस कोशिश कीजिए कि आप भीड़ का हिस्सा न बनें— फिर चाहे बात खेती-किसानी की ही क्यों न हो। जो सब उगा रहे हैं, अगर आप भी वही उगाएँगे, तो या तो साधारण ल...