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मोरिंगा ओलिफेरा [मूंनगा/सहजन ]

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मोरिंगा ओलिफेरा [मूंनगा/सहजन ] मुन्गा वृक्ष की खेती भारत में सबसे अधिक की जाती है। यह एक पौष्टिक सब्जी वाला वृक्ष है जिसके अनेक उपयोग भी है। यह दुनिया के सबसे उपयोगी वृक्षो में से एक माना जाता है। मुन्गा के वृक्ष के प्रत्येक हिस्से, जड़ से लेकर पत्तियों तक के लाभकारी गुण है। लगभग वृक्ष के संपूर्ण हिस्सों का उपयोग किया जाता है।  उपयोग:-  पत्तियों का उपयोग रक्तचाप और ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने, स्कर्वी, घाव, ट्यूमर और सूजन के उपचार में किया जाता है। जडों का उपयोग अपच, दस्त, पेट का दर्द, पेट फूलना, पक्षाघात, सूजन, बुखार और गुर्दे के उपचार में किया जाता है। बीज नसों के दर्द, सूजन और आंतरिक बुखार उपयोगी होते है। छाल से प्राप्त लाल गोंद दस्त के उपचार में प्रयोग करते है। तेल का उपयोग इत्र और केश प्रसाधन में किया जाता है। उपयोगी भाग : जडें ,बीज, पत्तियाँ ,फलियाँ मुख्य रूप से इसकी दो प्रकार की खेती की जाती है :- पत्तियों की खेती :- प्रति एकड़  बीज:- सात किलो बीज 12000 से 15000 लागत अन्य लागत :- जुताई ,क्यारियां बनवाना ,गोबर खाद ...

अकरकरा [Anacyclus pyrethrum]

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अकरकरा आयुर्वेदिक  ग्रंथों में खासकर मध्यकालीन ग्रंथों में इसे आकारकरभ नाम से वर्णित किया गया है जिसे हिंदी में अकरकरा भी कहा जाता है।अंग्रेजी में इसी वनस्पति का नाम पेलिटोरी है।इस वनस्पति का प्रयोग  ट्रेडीशनल एवं पारंपरिक चिकित्सकों द्वारा दांतों एवं मसूड़े से सम्बंधित समस्याओं को दूर करने हेतु सदियों से किया जाता रहा है| इस पौधे के सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग इसके फूल एवं जडें हैं।जब इसके फूलों एवं पत्तियों को चबाया जाता है तो यह एक प्रकार से दाँतों एवं मसूड़ों में सुन्नता उत्पन्न करता है। इसके फूल इसके सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं।यूँ तो इसे मूल रूप से ब्राजील एवं अफ्रीका से आयी वनस्पति माना जाता है लेकिन यह हर प्रकार के वातावरण चाहे वो उष्णता हो या शीतकालीन में उगने वाली वनस्पति है।इस पौधे की विशेषता इसके फूलों का विशिष्ट आकार है जो कोन यानि शंकु के आकार के होते हैं।पत्तियों का प्रयोग त्वचा रोग में भी किया जाता है। जानिए विभिन्न रोगों में अकरकरा से उपचार 1 पक्षाघात (लकवा) में अकरकरा : अकरकरा की सूखी डण्डी महुए के तेल में मिलाकर मा...