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Showing posts from August, 2020

अजवाइन की खेती

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                                                                           अजवाइन की खेती  यह धनिया कुल (आबेलीफेरा) की एक महत्वपूर्ण मसाला फसल है। इसका वानस्पतिक नाम टेकिस्पर्मम एम्मी है तथा अंग्रेजी में यह बिशप्स वीड के नाम से जाना जाता है। इसके बीजों में 2.5-4% तक वाष्पशील तेल पाया जाता है।अजवाइन(celery seed )खजीज तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। इसमें 8.9% नमी, 15.4% प्रोटीन, 18.1% वसा, 11.9% रेशा, 38.6% कार्बोहाइड्रेट, 7.1% खनिज पदार्थ, 1.42% कैल्शियम एवं 0.30% फास्फोरस होता हैं। प्रति 100 ग्राम अजवाइन से 14. 6मी.ग्रा. लोहा तथा 379 केलोरिज मिलती हैं।   औषधीय गुण अजवाइन के पौधे के प्रत्येक भाग को औषधी के रूप में काम में लाया जाता हैं। अजवाइन पेट के वायुविकार, पेचिस, बदहजमी, हैजा, कफ, ऐंठन जैसी समस्याओं और सर्दी जुखाम आदि के लिए काम में लिया जाता हैं, तथा गले में खराबी, आवाज फटने, कान दर्द...

काली हल्दी या नरकचूर याक

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काली हल्दी Black Turmeric का पौधा दिखने में केले के समान होता है  काली हल्दी या नरकचूर याक औषधीय महत्व का पौधा  है | जो कि बंगाल में वृहद् रूप से उगाया जाता है | इसका उपयोग रोग नाशक व सौंदर्य प्रसाधन दोनों  रूपों में किया जाता है | वानस्पतिक नाम curcuma cacia व अंग्रेजी में ब्लेक जे डोरी भी कहते हैं  | यह जिन्नी विरेसी कुल का सदस्य है , इसका पौधा तना रहित 30 – 60 से.मी. ऊँचा होता है | पत्तियां चौड़ी गोलाकार उपरी स्थल  पर नील बैंगनी रंग की मध्य शिरा युक्त होती है | पुष्प गुलाबी किनारे की ओर रंग के शपत्र लिए होते हैं | राइजोम बेलनाकार गहरे रंग के सूखने पर कठोर किस्टल बनाते हैं | राइजोम का रंग कालिमा युक्त होता है| काली हल्दी उपयुक्त जलवायु :- इसकी खेती के लिए उपयुक्त जलवायु उष्ण होती है | तापमान 15 से 40 डिग्री सेन्टीग्रेट होना चाहिए | काली हल्दी हेतु  भूमि की तैयारी :-  दोमट, बलुई, मटियार प्रकार की भूमि में अच्छे से उगाई जा सकती है | वर्षा के पूर्व जून के प्रथम सप्ताह में 2 – 4 बार जुताई करके मिट्टी  भुरभुरी बना लें तथा जल निकासी की व्यवस्था करलें |...